इसलिए हमें सदैव दूसरों की अच्छाइयाँ देखनी चाहिए, बुराईयाँ नहीं। क्योंकि बुराईयाँ स्वयं में ही बहुत होती हैं, हमें सदैव अपनी बुराईयाँ ढूंढ कर उन्हें दूर करना चाहिए। इसी लिए गुरबाणी में लिखा है “कबीर सभ ते हम बुरे हम तजि भलो सभु कोइ॥“